तुषारापात TUSHARAPAT
Tushrapat
Friday, 18 April 2014
Tuesday, 8 April 2014
रामनवमीं पर सभी रामभक्तों को हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर हम अपने धर्म -संस्कृति ,राष्ट्र और अपनी व् अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा करने का संकल्प लें।
मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव रामनवमीं पर सभी रामभक्तों को हमारी ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। इस अवसर पर हम अपने धर्म -संस्कृति ,राष्ट्र और अपनी व् अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा करने का संकल्प लें। आज हमारे सामने अपने राष्ट्र और धर्म को आतंक से बचाने की चुनौती तो है ही साथ ही देश में सर उठा रही अलगाववादी ताकतों का खतरा भी मंडरा रहा है। इन सब चुनौतिओं से देश और धर्म को बचाने के लिए हमें आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर राष्ट्र और धर्म विरोधी शक्तिओं का मुकाबला करने की शपथ लेनी चाहिए। यही संकल्प राम का सन्देश है और यही हमारा राष्ट्र धर्म भी है।
Monday, 31 March 2014
हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2071 [31 मार्च ,2014 ] की सभी को हार्दिक शुभकामनायें । आओ, हम इस अवसर पर अपनी गौरवशाली संस्कृति और धर्म की रक्षा का संकल्प लें।
हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2071 [31 मार्च ,2014 ]की सभी को हार्दिक शुभकामनायें। आओ, हम इस अवसर पर अपनी गौरवशाली संस्कृति और धर्म की रक्षा का संकल्प लें।हम अपनी जड़ों से कटें नहीं बल्कि उसके साथ मजबूती के साथ खड़े हों ,इससे ही हमारे धर्म ,संस्कृति - मर्यादा की पहचान विश्व में कायम रह पायेगी। एक बात और जो हमें हमेशा याद रखनी चाहिए कि पुरे विश्व में हिंदुओं के रहने के लिए एकमात्र भारत भूमि ही शेष बची है। इस भारत भूमि का अस्तित्व तभी तक है जब तक यहाँ पुरातन धर्म -संस्कृति अस्तित्व में है ,जहां से सनातन संस्कृति -धर्म की पहचान समाप्त हो गयी वहीं धरमनिर्पेक्षता ,लोकतंत्र और शांति का भी लोप हो गया। इसका सबसे नवीनतम और जीता -जागता उदहारण पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में हमारे सामने है। हमें इस भ्रम और भुलावे में नहीं रहना चाहिए कि हम अपने धर्म -संस्कृति की जड़ों से कटकर भी इस दुनिया में अपनी हज़ारों वर्ष पुरानी पहचान को कायम रख पाएंगे। इसी लिए हमें इस नव वर्ष पर यह प्रण करना चाहिए कि हम देश -धर्म और अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा के लिए देश की बागडौर मजबूत हाथों में सौंपे न कि तथाकथित धरमनिर्पेक्षता का ढिंढौरा पीटनेवाले अल्पसंख्कों के नाम पर सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण करने में लगे ढोंगी दलों और नेताओं के हाथ में।
Tuesday, 4 March 2014
आज भी हिंदुओं को एक कमजोर और डरपोक धर्म इसीलिए माना जा रहा है कि हमें अपने देवी -देवताओं और अवतारों से ज्यादा भरोसा पाखंडी बाबाओं ,मुल्ला -मौलीविओं ,ज्योतिषों -तांत्रिकों , दैवीय चमत्कारों और मज़ारों पर है।
हिन्दू आज इतना कमजोर और डरपोक क्यों बन गया है ?इस तरफ न तो हिन्दू धर्म के झंडाबरदारों ने और न ही इसके धर्माचार्यों ने ही सोचने की आवश्यकता महसूस की है। सच तो यह है कि हिंदुओं को इस स्थिति में लाने के जिम्मेदार ही वो लोग हैं जो हर परेशानी का हल पाठ -पूजा और व्रत -उपवास को बताते हैं। हम अपने अवतारों को पूजते तो हैं परन्तु उनमें हमारा विश्वास नहीं है अगर ऐसा होता तो हिन्दू समाज बाबाओं ,तांत्रिकों ,मुल्ला -मौलविओं के यहाँ न धक्के खाता फिरता और न ही मजारों -कब्रों पर प्रशाद और चद्दर चढ़ाता फिरता। हमारे किसी भी अवतार ने चाहे वो श्री राम हो या श्री कृष्ण हमें संकट के समय भगवान से गिड़गिड़ाने की शिक्षा नहीं दी ,उन्होंने तो कर्म करने और पूरी शक्ति से संकट का मुकाबला करने की राह हमें दिखाई है। इन अवतारों ने भी स्वयं अधर्मी और अत्याचारिओं का ताकत के साथ मुकाबला किया और उन आततायी शक्तिओं का समूल नाश करके धर्म और राष्ट्र की रक्षा करके एक रास्ता और आदर्श हमें दिखाया। हमारे सभी देवी -देवताओं ने भी आसुरी शक्तिओं से सशस्त्र मुकाबला किया और उनपर विजय पाई, लेकिन हमने उनकी पूजा को ही अपनी मुसीबतों का हल समझ लिया। पूजा - पाठ करना कोई बुरी बात नहीं है परन्तु जब दुश्मन सामने तलवार लिए हमारा सर काटने पर उतारू हो तो उस समय पूजा -पाठ ,प्रार्थना करना कभी भी हमारे हित में नहीं हो सकता। अफ़सोस इस बात का है कि हिंदुओं ने अपने अवतारों और भगवानों को पूजना तो जारी रखा मगर उनकी दिखाई राह पर चलना छोड़ दिया। जब कभी परेशानी से सामना हुआ तो उसका मुकाबला करने की बजाय टोने -टोटके ,बाबाओं के पैरों में गिरकर उनसे मदद की गुहार करने ,तांत्रिकों से उपाय पूछने ,कब्रों -मजारों पर माथा रगड़ने की राह को चुना और किसी दैवीय चमत्कार की ही कामना करने को प्राथमिकता दी। हमारी इसी मानसिकता के कारण हमारी बार -२ पिटाई हुयी और हम एक हज़ार वर्षों तक गुलाम रहे। पूरी दुनिआ में कोई दूसरा ऐसा देश या धर्म नहीं है जो इतने लम्बे समय तक गुलाम रहा हो। इतना होने के बाद भी हमने अपने इतिहास में हुई गलतिओं से कोई सबक नहीं लिया। हमारी इसी सोच से हमारे देश का टुकड़ा हुआ और धर्म को भी कमजोर माना गया। आज भी हिंदुओं को एक कमजोर और डरपोक धर्म इसीलिए माना जा रहा है कि हमें अपने देवी -देवताओं और अवतारों से ज्यादा भरोसा पाखंडी बाबाओं ,मुल्ला -मौलीविओं ,ज्योतिषों -तांत्रिकों , दैवीय चमत्कारों और मज़ारों पर है। जब हम अपने भगवान पर ही विश्वास नहीं कर रहे तो वह हमारी मदद कैसे कर सकता है ?आज हिन्दू दर -दर भटकने , अलग -२ मतों को मानने के चककर में पड़ कर अपना ,अपने धर्म और राष्ट्र का अहित करने में लगा हुआ है ,हम इस बात को भूल रहे हैं कि दुनिआ में हमेशा ताकतवर के कुत्ते को भी कोई नहीं छेड़ता और कमजोर के भगवान की भी पिटाई होती है। इसके साथ पूरी दुनिआ में भारत के अलावा कोई दूसरा ऐसा राष्ट्र नहीं है जहां हिंदुओं को पनाह मिल सकेगी। इस बात को हमें गम्भीरता से सोचना पड़ेगा कि हमें किस राह पर चलना है ?अपने देवी -देवताओं राम -कृषण के बताये मार्ग पर या लालची -लम्पट बाबाओं ,मुल्ला -मौलविओं के सुझाय टोटकों को मानकर अपना आर्थिक और शारीरिक शोषण करवाना है या फिर कब्रों और मज़ारों पर अपना माथा रगड़कर अपने धर्म को कमजोर बनाना है ?
Thursday, 27 February 2014
भारत की आज़ादी की लड़ाई में असंख्य वीरों ने अपने जीवन को बलिदान कर दिया था ,मगर आज़ादी मिलने के बाद देश की सत्ता पर काबिज होने वाले नेताओं ने उन शहीदों को याद करना भी मुनासिब नहीं समझा।
भारत की आज़ादी की लड़ाई में असंख्य वीरों ने अपने जीवन को बलिदान कर दिया था ,मगर आज़ादी मिलने के बाद देश की सत्ता पर काबिज होने वाले नेताओं ने उन शहीदों को याद करना भी मुनासिब नहीं समझा। इसी श्रेणी में अमर बलिदानी चंद्रशेखर आज़ाद का नाम भी रखा जा सकता है जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। आज [27 फरवरी,1931] उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके चरणों में अपना शत -२ नमन करते हैं। भारत की जनता उनके द्वारा भारत माँ को गुलामी की जंजीरों से मुक्ति दिलाने के किये गए संघर्ष में दिए गए बलिदान का सारा देश हमेशा ऋणी रहेगा।बड़े अफ़सोस की बात है कि जिन लोगों ने आज़ाद भारत की बागडौर सम्भाली उन्हें सिर्फ गांधी और नेहरू के योगदान को ही सर्वोपरि माना और देश पर अपना सर्वस्व न्योछावर करनेवाले भारत माँ के असंख्य सपूतों का बलिदान उन्हें तुच्छ ही लगा। आज़ाद ने देश के स्वतन्त्रता संग्राम के लिए गांधी के अहिंसा के मार्ग की बजाय हिंसा के मार्ग को सही माना और अंग्रेजों के साथ अपने जीवन की आखरी घड़ी तक सशस्त्र संघर्ष किया।आज़ाद देश की आज़ादी की सशत्र लड़ाई लड़ने वाले क्रांतिकारियों के नायक थे और सभी उनको अपना बड़ा मानकर उनके आदेशों का पालन भी करते थे।
आज़ाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को इलाहबाद के भंवरा गॉव में पंडित सीता राम तिवारी और जगरानी तिवारी के यहाँ पुत्र के रूप में हुआ। इनका पूरा नाम चंद्रशेखर तिवारी था। इनकी शिक्षा महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हुई।सन 1921 में असहयोग आंदोलन में भाग लेने के कारण अंग्रेज सरकार ने अल्प आयु 15 में ही गिरफ्तार कर लिया गया। 15 बेंतो की सज़ा पाकर भारत माँ का यह सपूत हमेशा के लिए 'आज़ाद ' के नाम से विख्यात हो गए। वो 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट' रिपब्लिकन ऐसोसिएशन के कमांडर इन चीफ हो गए। इनके दल ने क्रांतिवीरों की मदद हेतु 9 अगस्त ,1925 को काकोरी के पास रेल में जा रहे सरकारी खज़ाने को लूट लिया। आज़ाद भूमिगत होकर अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध आज़ादी की लड़ाई की गतिविधिओं का संचालन करते रहे। अंग्रेजी हकूमत ने आज़ाद की गिरफ्तारी के लिए 30 हज़ार रूपए का इनाम का ऐलान कर दिया। आज़ाद ने कसम खाई कि वह जिन्दा जी कभी गिरफ्तार नहीं होंगे।लाठीचार्ज के कारण लाला लाजपत राय की मौत का बदला सांडर्स की लाहौर में आज़ाद ने भगत सिंह के साथ मिलकर हत्या करके लिया। आज़ाद 8 अप्रैल ,1929 को ऐसेम्बली बम्बकांड के षड्यंत्र में भी शामिल थे। किसी मुखबिरी के कारण 27 फरवरी ,1931 को पुलिस द्वारा आज़ाद के इलाहबाद के एल्फ्रेड पार्क में चारों तरफ से घिर गए। पुलिस के साथ गोलाबारी हुयी और जब उन्होंने यह समझ लिया कि उनका बचना मुश्किल है तो उन्होंने अपनी रिवाल्वर की आखरी गोली खुद को मारकर अपना बलिदान दे दिया। आज़ाद ने प्रण लिया था कि वह जीते जी अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे ,अपने इसी प्रण को अपने रिवाल्वर की गोली से मात्र 25 वर्ष की आयु में पूरा किया। इस महान विभूति का सारा देश हमेशा -2ऋणी रहेगा।
हिन्दू धर्म के विरोधियों को सदबुधि आये और महाकाल सभी आसुरी ताकतों का विनाश करने की शक्ति और हौंसला अपने धरमप्रेमी भक्तों को प्रदान करें।
महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। भगवान शिव आपके सभी कष्टों का निवारण करें और आपके जीवन को सुखमय ,समृद्ध ,स्वस्थ और मंगलकारी बनाएँ। महादेव से हमारी यही कामना है कि वह भारत को विश्व का एक शक्तिशाली और प्रभावशाली राष्ट्र बनाने का आशीर्वाद हमें प्रदान करेंगे। हिन्दू धर्म के विरोधियों को सदबुधि आये और महाकाल सभी आसुरी ताकतों का विनाश करने की शक्ति और हौंसला अपने धरमप्रेमी भक्तों को प्रदान करें। आज महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर हम महादेव शिव से यही प्रार्थना करते हैं। ॐ नमो शिवाय ,ॐ नमो शिवाय। नमो -नमो
Friday, 21 February 2014
माँ की ममता
माँ तो आखिर माँ होती है
माँ से बढ़कर इस दुनिया में
कोई चीज कहाँ होती है ,
माँ तो आखिर माँ होती है।
दर्द हमें जब होता है
मुंह से माँ निकलता है ,
क्योंकि बच्चों के दुःख से
माँ का दिल तड़पता है।
सच कहते हैं लोग सयाने ,
माँ तो ठंडी छाँव होती है ,
माँ तो आखिर माँ होती है।
माँ एक महाशक्ति है
माँ ईश्वर की भक्ति है
अपने बच्चों की खातिर
माँ कुछ भी कर सकती है ,
माँ की तो तारीफ भला
किन शब्दों में बयां होती है ,
माँ तो आखिर माँ होती है।
माँ बिना यूँ लगता है
जीवन में क्या रखा है
झूठा प्यार है लोगों का
माँ का प्यार ही सच्चा है।
माँ बिना यह जिंदगी सच में
बहुत ही तन्हा होती है।
माँ तो आखिर माँ होती है।
Wednesday, 19 February 2014
शिवाजी जैसे हिन्दू वीरों से प्रेरणा लेकर हमें अपनी और अपने धर्म की रक्षा हेतु हमेशा तत्पर रहना चाहिए नाकि हरामी और पाखंडी बाबाओं और कथावाचकों के चककर में पड़कर कायर और भयभीत होकर अपना जीवन काटना चाहिए
क्षत्रपति शिवाजी महाराज भारत के वह इतिहास पुरुष हैं जिन्होंने अपनी वीरता और युधकौशल से मुग़ल साम्राज्य को नाको चने चबवाये और इतिहास के सबसे क्रूर ,कट्टर ,मुसलमान मुग़ल बादशाह औरंगजेब के घुटने टिकवा कर दक्षिण के बहुत बड़े क्षेत्र को अपने अधिपत्य में लेकर विशाल हिन्दू साम्राज्य की नींव रख दी। यह हिन्दू साम्राज्य का भगवा ध्वज औरंगज़ेब की इस्लामिक नीति के सीने में में गाड़ कर हमेशा -२ के लिए औरंगज़ेब के उस मनसूबे को धूल -धूसरित कर डाला जिसके तहत वह पुरे भारत का इस्लामिककरण करके जन्नत में गाज़ी की उपाधि पाना चाहता था। भारत माँ के इस वीर योद्धा और हिन्दू राजा क्षत्रपति शिवाजी महाराज के आज [19 फरवरी ,1630 ] जन्म दिवस पर उनके श्री चरणों में हमारा शत -2 नमन है।शाहजी भोंसले की पत्नी जीजाबाई (राजमाता जिजाऊ) की कोख से शिवाजी महाराज का जन्म १९ फरवरी, १६३० को शिवनेरी दुर्ग में हुआ था। शिवनेरी का दुर्ग पूना (पुणे) से उत्तर की तरफ़ जुन्नार नगर के पास था। उनका बचपन उनकी माता जिजाऊ के मार्गदर्शन में बीता। वह सभी कलाओ मे माहिर थे, उन्होंने बचपन में राजनीति एवं युद्ध की शिक्षा ली थी । ये भोंसले उपजाति के थे जोकि मूलत: कुर्मी जाति से संबद्धित हे | कुर्मी जाति कृषि संबद्धित कार्य करती हे | उनके पिता अप्रतिम शूरवीर थे और उनकी दूसरी पत्नी तुकाबाई मोहिते थीं । उनकी माता जी जीजाबाई जाधव कुल में उत्पन्न असाधारण प्रतिभाशाली थी और उनके पिता एक शक्तिशाली सामन्त थे । शिवाजी महाराज के चरित्र पर माता-पिता का बहुत प्रभाव पड़ा। बचपन से ही वे उस युग के वातावरण और घटनाओँ को भली प्रकार समझने लगे थे। शासक वर्ग की करतूतों पर वे झल्लाते थे और बेचैन हो जाते थे। उनके बाल-हृदय में स्वाधीनता की लौ प्रज्ज्वलित हो गयी थी। उन्होंने कुछ स्वामिभक्त साथियों का संगठन किया। अवस्था बढ़ने के साथ विदेशी शासन की बेड़ियाँ तोड़ फेंकने का उनका संकल्प प्रबलतर होता गया।छत्रपति शिवाजी महाराज का विवाह सन् १४ मइ १६४० में सइबाई निम्बालकर के साथ लाल महल,पुना में हुआ था ।
आज हिन्दू धर्म का अस्तित्व अगर दुनिया में है तो वीर शिवाजी का इसमें एक महत्वपूर्ण योगदान है जिन्होंने अपनी तलवार की धार से हिन्दू धर्म को समूल नष्ट करने वाले आततायी मुस्लिम कटटरपंथी शासकों को धड़विहीन कर दिया । आज हिन्दू धर्म के अनुयायिओं को अगर किसी महापुरुष की पूजा करनी चाहिय तो वीर शिवाजी जैसे योद्धाओं की करनी चाहिए , जिन्होंने मंदिरों में आरती करने और कथा -प्रवचनों को सुनने की बजाय अपनी पूरी शक्ति और चतुराई से उन जनूनी शासकों के विरुद्ध युद्ध किया जो इस्लाम के अलावा किसी दूसरे धर्म अनुयायी को जिन्दा ही नहीं देखना चाहते थे। शिवाजी जैसे हिन्दू वीरों से प्रेरणा लेकर हमें अपनी और अपने धर्म की रक्षा हेतु हमेशा तत्पर रहना चाहिए नाकि हरामी और पाखंडी बाबाओं और कथावाचकों के चककर में पड़कर कायर और भयभीत होकर अपना जीवन काटना चाहिए ,यही धर्म का सन्देश है और यही हिन्दू होने का वास्तविक अर्थ। आज हिन्दू लोग सिवाय पूजा -पाठ करने और देवताओं के सामने गिड़गिड़ाने में ही अपनी और अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा को पुख्ता मान कर अपने आप को धोखा देने में लगा हुआ है। कोई भी देश - कौम और धर्म सिर्फ पूजा -पाठ करने और अपने देवताओं के आगे लेटे रहने से अधिक दिन तक अपना अस्तित्व कायम नहीं रख सकता इसके लिए संघर्ष और बलिदान करना ही आवश्यक होता है। यही संकल्प हमें वीर शिवाजी महाराज के जन्मदिवस पर लेना चाहिय।
शिवाजी एक समर्पित कत्तर हिन्दु थे पर वह् धार्मिक सहिष्णुता के पक्षपाती भी थे । उस्के साम्राज्य में मुसलमानों को धार्मिक स्वतंत्रता थी और मुसलमानों को धर्मपरिवर्तन के लिेए विवश नहीं किया जाता था । कई मस्जिदों के निर्माण के लिए शिवाजी ने अनुदान दिया । हिन्दू पण्डितों की तरह मुसलमान सन्तों और फ़कीरों को भी सम्मान प्राप्त था । उस्कि सेना में मुसलमानों की संख्या अधिक थी । पर वह् हिन्दू धर्म का संरक्षक थे । पारम्परिक हिन्दू मूल्यों तथा शिक्षा पर बल दिया जाता था । वह् अपने अभियानों का आरंभ भी अक्सर दशहरा के मौके पर करते थे
Friday, 14 February 2014
संत शिरोमणि रविदास ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराईओं पर कुठाराघात किया और मानव जाति को सही राह दिखाई ,उनकी जयंती पर उनके चरणों में हमारा शत -२ नमन
संत रविदास का नाम भारत के संतों में शिरोमणि के रूप में स्थापित है ,जिन्होंने पूरी मानव जाति को प्रेम और भाईचारे का सन्देश दिया और सभी को एक पिता परमेश्वर की संतान बताते हुए आपसी भेदभाव को समाप्त करने का सन्देश दिया। उनकी रचनायों की आज के युग में भी वही सार्थकता है जो उनके समय में थी। आज उनकी जयंती पर हम उनके चरणों में अपना शत -२ नमन करते हैं और उनके द्वारा स्थापित सिद्धांतों को अपनाने का संकल्प भी लेते हैं।
उनकी रचनाओं का समावेश गुरु ग्रन्थ साहिब में भी किया गया है जो आज भी मानव जाती को जीने की सही राह दिखती हैं। संत कुलभूषण कवि रैदास उन महान संतों में अग्रणी थे जिन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज में व्याप्त बुराइओं को दूर करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका जनम 15 जनवरी ,1377 को वाराणसी में हुआ था। उनकी माता का नाम कलसा देवी और पिता का नाम बाबा संतोख दास था। उनकी पत्नी का नाम माता लोना देवी था।
तोही मोही मोही तोही अंतरु कैसा ॥ कनक कटिक जल तरंग जैसा ॥१॥जउ पै हम न पाप करंता अहे अनंता ॥ पतित पावन नामु कैसे हुंता ॥१॥ रहाउ ॥
तुम्ह जु नाइक आछहु अंतरजामी ॥ प्रभ ते जनु जानीजै जन ते सुआमी ॥२॥
सरीरु आराधै मो कउ बीचारु देहू ॥ रविदास सम दल समझावै कोऊ ॥३॥
ਤੋਹੀ ਮੋਹੀ ਮੋਹੀ ਤੋਹੀ ਅੰਤਰੁ ਕੈਸਾ ॥ ਕਨਕ ਕਟਿਕ ਜਲ ਤਰੰਗ ਜੈਸਾ ॥੧॥
ਜਉ ਪੈ ਹਮ ਨ ਪਾਪ ਕਰੰਤਾ ਅਹੇ ਅਨੰਤਾ ॥ ਪਤਿਤ ਪਾਵਨ ਨਾਮੁ ਕੈਸੇ ਹੁੰਤਾ ॥੧॥ ਰਹਾਉ ॥
ਤੁਮ੍ਹ੍ਹ ਜੁ ਨਾਇਕ ਆਛਹੁ ਅੰਤਰਜਾਮੀ ॥ ਪ੍ਰਭ ਤੇ ਜਨੁ ਜਾਨੀਜੈ ਜਨ ਤੇ ਸੁਆਮੀ ॥੨॥
ਸਰੀਰੁ ਆਰਾਧੈ ਮੋ ਕਉ ਬੀਚਾਰੁ ਦੇਹੂ ॥ ਰਵਿਦਾਸ ਸਮ ਦਲ ਸਮਝਾਵੈ ਕੋਊ ॥੩॥
You are me, and I am You-what is the difference between us? We are like gold and the bracelet, or water and the waves.If I did not commit any sins, O Infinite Lord,how would You have acquired the name, Patit-Pavan (Redeemer of sinners)?
You are my Master, the Inner-knower, Searcher of hearts.The servant is known by his God, and the Lord and Master is known by His servant.
Grant me the wisdom to worship and adore You with my body.
O Ravi Daas, one who understands that the Lord is equally in all, is very rare.
Sunday, 12 January 2014
क्या यह 'आप ' की प्रसिद्धि पाने और विपक्षी दलों को बदनाम करने की साजिश है ?
लखनऊ में आप के कुमार विश्वास की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक युवक ने जब उन पर अंडे फेंक कर हंगामा किया तो आप पार्टी के एक कार्यकर्त्ता के कान में उस युवक को कुछ समझा रहा है। यह दृश्य जी न्य़ूज ने दिखाया है। इसको देखकर क्या यह नहीं लगता कि ' आप ' ने जानबूझ कर यह नौटंकी प्रसिद्धि पाने के लिए और विपक्षी दलों को बदनाम करने की साजिश के तहत नहीं की गयी ? क्या आप इससे सहमत हैं ?कृपया अपनी टिप्प्णी करें -
Tuesday, 7 January 2014
हिन्दू धर्म की रक्षा में जिस त्याग और तपस्या की इबारत को गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके लिखा, उसको जब तक इस दुनिया का अस्तित्व रहेगा तब तक याद रखा जायेगा

हिन्दू धर्म के महान रक्षक गुरु गोबिंद सिंह जी ने अधर्मी और अन्यायी ताकतों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष करके जिस शौर्य और वीरता का उदहारण हमारे सम्मुख रखा उसका पूरा हिन्दू समाज सदैव ऋणी रहेगा। गुरु जी ने अपने समय के अत्याचारी मुग़ल शासकों के विरुद्ध तलवार उठायी और अपना पूरा वंश धर्म और राष्ट्र की रक्षा में न्योछावर करके जो अनौखा बलिदान दिया उसका पूरे इतिहास में कोई दूसरा उदाहरण देखने को नहीं मिल सकता। हिन्दू धर्म की रक्षा में जिस त्याग और तपस्या की इबारत को गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके लिखा, उसको जब तक इस दुनिया का अस्तित्व रहेगा तब तक याद रखा जायेगा। अपने पिता नवम गुरु तेग बहादुर के बलिदान के बाद गोबिंद राय ने धर्मयुद्ध को जारी रखते हुए अपने चारों पुत्रों को हिन्दू धर्म की बलिवेदी पर आहुति के रूप में समर्पित करके हताशा और निराशा में डूबे लोगों में शेरों जैसी शक्ति का संचार किया जो आज भी भारत माँ के सम्मान और आन के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए सिखों के सवरूप में हमेशा देखने को मिलता है।
पाँच दरियाओं की भूमि पंजाब सदियों से भारत राष्ट्र का सबसे प्रथम वो क्षेत्र रहा है जिसने विदेशी आक्रांताओं का सबसे पहले मुकाबला किया और हमेशा अपने को लहू -लुहान किया। इसके वीर पुत्रों -पुत्रिओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर सैदेव अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा की । ऐसी भूमि पर जन्में पौरस ने विश्विजय के अभियान पर निकले यूनान के सम्राट सिकंदर को रोककर पंजाब की भूमि और भारत माँ के सम्मान के लिए वीरता से युद्ध करके अपने पुत्र होने का धर्म निभाया।आगे चलकर मुग़ल काल में धर्म और राष्ट्र पर आये संकट को समाप्त करने हेतु आगे बढ़कर हमारे गुरुओं ने अपना धर्म निभाया।इस दौर के धरमयुध में गुरु गोबिंद सिंह का योगदान अतुलनीय है।हम आज हिन्दू धर्म के महान रक्षक गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर उनके चरणों में हमारा शत -२ नमन करते हैं।
आज हिन्दू धर्म फिर चारों ऒर से संकट में घिर चूका है और इसके अनुयायी पाखंडों और पोंगा -पंडितों में फंस कर अपने कर्त्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम भारत माँ के उन महान सपूतो के बलिदान को अपने दिलो -दिमाग में रखकर उनके बताये हुए सिंद्धांतों को अंगीकार करें। हिन्दू धर्म का अस्तित्व रहेगा तो यह महान राष्ट्र भी दुनिया में अपने गौरव को बचाकर रख पायेगा। यह पुण्य कार्य हम अपने महान संत -सिपाही गुरु गोबिंद सिंह के बताये और सुझाये मार्ग पर चल कर ही कर सकते हैं। आओ आज हम सब अपने उस अकाल पुरुष महान योद्धा और युगद्रष्टा सरवंश बलिदानी गुरु गोबिंद सिंह के जन्मदिवस पर अपने धर्म और राष्ट्र की रक्षा हेतु अपने को समर्पित करने का प्रण लें। http://tusharapat.blogspot.in/2014/01/blog-post_7.html
Sunday, 5 January 2014
कहीं मोदी को पीएम बनने से रोकने की कोई अंतर्राष्ट्रीय साजिश तो नहीं चल रही ?
देश में मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से सभी राजनैतिक दलों में तो घबराहट देखी ही जा रही है दूसरी ओर कुछ मीडिया संस्थानों में भी अजीब सी बेचैनी देखी जा सकती है। मीडिया की इस घबराहट को हम उनके चैनलों पर परोसी जा रही ख़बरों से महसूस कर रहे है जिनमें खबरों को बनाने की कसरत की जा रही है जैसे ',मोदी बनाम केजरीवाल ' और कभी कहा जा रहा है कि 'मोदी का रथ रोकेंगे केजरीवाल '-इन ख़बरों को देख कर सहज ही अंदाजा लग जाता है कि प्रस्तुति मोदी के विरुद्ध चल रहे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय अभियान की वो बानगी है जिसमें किसी भी तरह से मोदी को पीएम बनने से रोकना ही एकमात्र उदेश्य है।
देश में कांग्रेस के विरुद्ध जनता में गहरा रोष होने के बावजूद ।इन खबरों में दिखाया जा रहा है कि' मोदी का ग्राफ गिर रहा है.कांग्रेस के विरुद्ध जनता ने अपने जबर्दस्त रोष का इजहार अभी हाल में आये राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों में व्यक्त कर दिया है ।लेकिन देश कि राजधानी दिल्ली में भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी कांग्रेस ने ७० सीटों में से सिर्फ ८ सीटें जीतकर ३२ सीटें जीतनेवाली भाजपा को सत्ता से दूर रखने की साजिश के तहत मात्र २८ सीटें जीतनेवाली'आप' की अनैतिक सरकार बनवा कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में काबू करके यह सन्देश दिया है कि वह सारे पाप करके भी आप के माध्यम से सत्ता की डोर अपने हाथों में रखने की क्षमता रखती है। आश्चर्य की बात यह है कि दिल्ली में अनैतिक सरकार को मीडिया भी ऐसे प्रस्तुत कर रही है जैसे यह दिल्ली के लोगों का जनादेश है। अगर दिल्ली में ऐसी सरकार को जनता चाहती होती तो वह बीजेपी को ३२ सीटों पर जीता कर विधानसभा में सबसे बड़े दल के रूप में स्थापित नहीं करती। केजरीवाल के मामले में एक तरफा ख़बरों को परोसने की कवायद से उन चैनलों की निष्पक्षता पर प्रशनचिन्ह [?] लग गया है। दिल्ली में कुछ लुभावनी घोषणाएं करके सीएम केजरीवाल ने लोगों को जिस तरह से गुमराह करने की कौशिशकी है उसकी असलियत जल्दी ही सामने आ जायेगी तब लोगों को इस अनैतिक सरकार को गठित करवाने के पीछे कांग्रेस की असली मंशा का पता चलेगा कि कांग्रेस किस बेशर्मी से जनादेश को भी उलटने की हिमाकत करने में माहिर है। इस सरकार की आयु ज्यादा लम्बी नहीं है और भावी लोकसभा चुनावों के बाद इसका धराशायी होना निश्चित है।लेकिन एक बार तो बीजेपी को सत्ता पाने से रोकने की साजिश कामयाब हो गयी लगती है जिसमे आप जैसे स्वंभू ईमानदार केजरीवाल और उनकी टीम जो चुनाव में कांग्रेस के विरुद्ध गम्भीर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लगाकर चुनाव लड़े थे ,चुनाव के बाद उसी कांग्रेस के समर्थन से सत्ता सुख भोगने में इतने मदमस्त हो गए हैं कि अब शीला दीक्षित के विरुद्ध किसी भी भ्रष्टचार के सबूत होने से ही इनकार कर रहे हैं।
ऐसा भी दिख रहा है कि मोदी जैसे दमदार व्यक्ति के हाथों में भारत की बागडौर आने की सम्भावना मात्र से ही देश के अंदर और देश के बाहर बैठे कुछ भारत विरोधी लोग परेशान है और वो किसी भी कीमत पर मोदी को सत्ता से दूर रखना चाहते हैं। मोदी के आने से भारत एक शक्तिशाली देश की हैसियत पा लेता है तो उन लोगों और देशों को तकलीफ हो सकती है जो भारत को एक कमजोर देश बनाकर अपनी उँगलियों पर नचाते रखना चाहते हैं और इसकी बागडौर किसी कमजोर इरादेवाले व्यक्ति के हाथों में रखकर अपने नापाक इरादों को पूरा करने कि मंशा रखते हैं। और ऐसा वो अब तक करते भी आये हैं ,इसीलिए वो शक्तियां मोदी को पीएम न बन सके इसकेलिए मोटी धनराशि खर्च कर रही है और कुछ मीडिया संसथान भी इसमें लाभान्वित हुए हो ऐसा हो सकता है ?देश में मोदी को बदनाम करने ,उनको किसी न किसी आरोप में घेरने की साजिश पिछले कई वर्षों से की जा रही है और उसमें नाकाम रहने के बावजूद अंतर्राष्ट्रीय साजिश के तहत हो सकता है यह अभियान चलाया जा रहा हो जिसमें कुछ नए -पुराने राजनैतिक दल ,गैर सरकारी संगठन और मीडिया संसथान भी शामिल हो सकते हैं ?देश की जनता को किसी भी लुभावने वादों और अभियान से सचेत रह कर देश के दुश्मनों द्वारा रचे जा रहे षड्यंत्र को समझना होगा और देश की बागडौर किसी लुंजपुंज व्यक्ति कि बजाय मोदी जैसे दृढ़ इच्छाशक्तिवाले सशक्त हाथों में सौंपकर अपना और अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का अपना राष्ट्रिय धर्म निभाना होगा।
Friday, 18 October 2013
महर्षि बाल्मीकि प्रकटोत्सव पर उनके चरणों में हमारा शत -२ नमन
आओ हम आज महर्षि बाल्मीकि के आदर्शों पर चलने का संकल्प लें
युगद्रष्टा ,महान संत,समाज सुधारक एवम आदि रामायण
के रचयिता महर्षि बाल्मीकि के प्रकटोत्सव पर सभी मित्रों
और शुभचिंतको को मेरी ओर से हार्दिक शुभकामनायें।
हम भगवान बाल्मीकि के चरणों में शत -२ नमन करते हैं।
आज हिन्दू समाज उनके आदर्शों पर चलकर अपने अन्दर
आई कमजोरी ,पाखंड और भेदभाव के कारण होनेवाले
बाहरी आक्रमणों को रोक सकता है। आओ हम इस शुभ अवसर इस पुन्य कार्य को करने की शपथ लें ,यही समय की भी पुकार है और इसको अनसुना किया तो हमारे पास पश्चाताप के आलावा कुछ नहीं बचेगा।
Wednesday, 16 October 2013
यह कुर्बानी है या कत्ल ? कुर्बानी हमेशा कमजोरों की दी जाती है शेरों की नहीं
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| इसे कुर्बानी कहे या कत्ल ? |
Tuesday, 10 September 2013
: क्या चाहता है इस्लामिक कट्टरवाद और क्यों बार -बार ...
सजगवार्ता sajagvarta : क्या चाहता है इस्लामिक कट्टरवाद और क्यों बार -बार ...: आज जिस तरह से यूपी के मुज्जफर नगर को साम्प्रदायिकता की आग ने घेर लिया है ,उसके लिए वहां कि समाजवादी सरकार की मुस्लिम तुष्टिकरण की घटिया नी...
Friday, 30 August 2013
मुसलमानों को आरक्षण की नहीं परिवार नियोजन की जरूरत है मुसलमानों के पिछड़ेपन का कारण उनकी जेहादी मानसिकता है ,जिसको बदलना जरूरी है
क्या देश और समाज की तरक्की की रफ़्तार को नहीं रोक रहा आबादी का बढ़ता बोझ ? क्यों परिवार नियोजन अपनाने वालों को नहीं मिलता सरकारी योजनाओ का लाभ ?
देश में मुसलमानों को वोटों की खातिर राजनैतिक दल उनको कभी आरक्षण का झुनझुना दिखाते हैं और कभी उनके पिछड़ेपन के लिए उनके साथ किया जानेवाला प्रशासनिक भेदभाव बताया जाता है।यह सारी कसरत और नौटंकी सिर्फ मुसलमानों का सबसे बड़ा हितैषी बनकर उनके वोट पाने की जुगत के तहत कथित सेकुलर नेता और राजनैतिक दलों द्वारा की जाती है।मुस्लमान भी इसमें खुश हैं क्योंकि इस आड़ में वह अपने जेहादी एजेंडे के तहत अपनी आबादी बढ़ाने की मुहीम में दिन -रात जुटे हुए हैं।मुसलमानों के पिछड़ेपन की असली वजह उनका परिवार नियोजन को न अपनाना है और आबादी के बढ़ने की वजह से भारत का विकास भी बाधित होता जा रहा है।
आज मुसलमानों के छोड़कर सभी अन्य धर्मों को मानने वाले लोगों में 2 या 3 बच्चों को ही पैदा करने की परम्परा चल रही है। इसके पीछे इन लोगों की सोच है कि महंगाई और बेरोजगारी के इस दौर में कम संतान होने से वह अपने परिवार का भरण -पोषण ठीक तरह से कर पाएंगे और अपने बच्चों को भी अच्छी शिक्षा देकर उनका भविष्य उज्जवल कर पाएंगे। इसके उलट मुसलमान अधिक संतान को पैदा करके अपनी और देश की तरक्की को रोकने के मिशन में लगे हुए हैं।इनके धार्मिक नेता भी इनको यही समझाने में कामयाब हो चुके हैं कि संतान अल्ला की देन है और इनको पैदा होने से रोकना अल्ला के आदेश की तोहीन है। इसके साथ ही आबादी बढ़ाने के पीछे यह मानसिकता भी काम कर रही है कि अगर उनकी संख्या अधिक होगी तो भारत पर उनका ही इस्लामिक राज कायम हो जायेगा।इसी कारण मेवात के इलाके में आज भी कई मुसलमानों के 15 से 20 बच्चे भी पाए जा रहे हैं। अधिक संतान होने की वजह से न तो उनका भरण -पोषण ठीक तरह से होता है और न ही उनको शिक्षा भी मिल पाती है। यही अशिक्षा अधिकांश लोगों को अपराध और अन्य असमाजिक कार्यों की ओर धकेल रही है। परिवार -नियोजन को न अपनाकर मुसलमान अपने पिछड़ेपन को तो आमंत्रित कर ही रहे हैं साथ ही समाज और देश की तरक्की की रफ़्तार को भी रोकने में लगे हुए हैं। कुछ माह पहले ही राजस्थान के अलवर जिले के एक गाँव में एक मुसलमान मेरे पास अपनी ओल्ड ऐज पेंशन की समस्या को लेकर आया। इसकी हालत बिलकुल दरिद्र थी और उसकी आयु 70 वर्ष थी।उसने तीन विवाह किये और अब उसके 9 लड़के और 3 लड़कियां हैं। मजेदार बात यह है कि सबसे छोटा लड़का सिर्फ ढाई माह का है।जब मैंने उससे सवाल किया कि इतनी गरीबी में इतने बच्चे क्यों ?तो उसका जवाब था कि साहब यह अल्ला की देन है।मेरे यह कहने पर कि अब उसकी अगली संतान कब होगी ?तो वह बोला कि यह तो अल्ला ही बता सकता है। यह सोच ही है मुसलमानों के पिछड़ेपन का कारण जो न तो किसी सरकारी योजना के लाभ और न ही उनको आरक्षण देने से समाप्त हो सकता है। ऐसी सोचवालों को अधिक संतान को पैदा करके कई लाभ स्वत ही मिल जाते हैं जैसे -

पहले आबादी बढ़ाना और फिर पिछड़ेपन का रोना
सरकार से गरीबी का प्रमाण पत्र तो मिल ही जाता है और पेंशन के साथ -2 गरीबों को मिलनेवाली सारी लाभकारी योजनाओ का लाभ भी।क्या इस आबादी का बोझ उन लोगों पर नहीं पड़ रहा जो सरकार को टैक्स देते हैं ,सरकारी योजनाओ के लाभ से वंचित रहते हैं और राजनैतिक दलों की उपेक्षा का शिकार भी उनको ही होना पड़ रहा है क्यों ?जवाब साफ है की वह लोग परिवार नियोजन को अपनाते हैं ,उनकी संतान अल्ला की देन नहीं है और वह मुस्लमान भी नहीं हैं।यह अभागे सरकार को टैक्स देकर और देश पर बोझ कम करके क्या कोई गुनाह करते हैं ?इसका जवाब गैर मुसलमानों यानि काफिरों को क्या यह सरकार ,सेकुलर नेता ,देश के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला हक़ बताने वाले अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ,सोनिया -राहुल गाँधी और ईमानवाले मुसलमान देने का कष्ट करेंगे http;tusharapat.blogspot.com/?http://sajagvarta.blogspot.com/http://sajagvarta.blogspot.com/
पहले आबादी बढ़ाना और फिर पिछड़ेपन का रोना
Thursday, 15 August 2013
आज देश को रिमोट कंट्रोल से चलने वाले नहीं मोदी जैसी इच्छाशक्ति वाले नेता की जरुरत है
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| देश की जनता में सबसे अधिक असरदार नेता |
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| जनता में बे -असरदार नेता |
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के स्वाधीनता दिवस के अवसर पर लालकिले से पढ़े गए भाषण का विश्लेष्ण करके मोदी के संबोधन से कांग्रेस के साथ-साथ कई अन्य नेता तो तिलमिला ही रहे हैं, इसके साथ मीडिया की भांड मण्डली भी महाबहस चला रही है। जितनी तीखी प्रतिक्रिया मोदी की कही बातों की होती है उतनी तेजी से उनकी लोकप्रियता का ग्राफ जनता में बढ़ रहा है। जो भाषण पीएम ने दिया वो किसी थके -हारे और हताश -निराश व्यक्ति का हो सकता है नाकि भारत जैसे परमाणु शक्ति से सम्पन्न राष्ट्र प्रमुख का। दूसरी ओर मोदी का भाषण ऐसा है जो इच्छाशक्ति से भरपूर किसी राष्ट्र नायक का हो। इसकी तुलना देश की जनता कर रही है और उनके विरोधी इससे घबराई सी दिखने लगी है। मोदी की यही कला है कि वह कुछ कहते हैं तो उसपर बढ़ी तीखी प्रतिक्रिया उनके विरोधी तो करते ही हैं साथ ही पूरा मीडिया भी उसपर अपनी महाबहस शुरू करके उसको इतना चर्चित कर देता है की कई दिन तक पर उस पर नेताओं में नोक-झोंक चलती रहती है। वास्तव में मोदी की लोकप्रियता को बढ़ाने में सबसे ज्यादा हाथ उनके विरोधियों का ही है।
आज जिन हालत से देश गुजर रहा है उनमें जनता एक ऐसे नेता की तलाश में थी जो किसी रिमोट कंट्रोल की बजाय अपनी सूझ-बुझ से चलना जानता हो और वह बिना रीढ़ का न हो। जनता को अपनी इसी इच्छा की पूर्ति मोदी के व्यक्तित्व में देखने को मिल रही है और यही बात उनके विरोधिओं की नींद हराम किये हुए है।
Wednesday, 14 August 2013
पाकिस्तान दूषित मानसिकता की पैदावार है जिसे आज भी उसके शासक पाले हुए हैं इसलिए वह कभी नहीं सुधरेगा
भारत के शासक बार -2 क्यों फंसते हैं पाक की "नापाक चालों " में ?
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| भारत के बंटवारे के नायक -नेहरु और जिन्ना |
पाकिस्तान कभी नहीं सुधर सकता उसकी नस्ल ही ऐसी है कि वह झूठ पर झूठ बोलता रहेगा और भारत के खिलाफ अपना जिहाद भी जारी रखेगा। भारत की सरकार हर बार उसके झूठ के जाल में फंसकर अपने राष्ट्र और जनता को दाव पर लगाती रहेगी ,भारत की इस कमजोरी को पाकिस्तानी भली -भांति जान चुके हैं । जिन तौर -तरीकों को पाकिस्तान ने अपना रखा है उसी को अपनाकर मुस्लिम लीग ने 1947 में भारत का लगभग एक तिहाई भू -भाग हथिया लिया और पाकिस्तान नाम का नापाक देश दुनिया के नक़्शे पर उभर आया। 1947 में भी कांग्रेस के नेताओं की यही नीति थी जो आज देखने को मिल रही है। मुसलमान पाकिस्तान नाम का एक बड़ा भू -भाग लेने के उपरांत भी कभी संतुष्ट नहीं हुए ,इसीलिए पाकिस्तान अपने जन्म से ही भारत को बर्बाद करने के नापाक कोशिशों में जुटा हुआ है। इसी कारण धर्म के नाम पर बंटवारा होने के बावजूद मुसलमानो की एक बहुत बड़ी आबादी भारत में ही रुक गयी और इस मुस्लिम आबादी को यहाँ रोकने के पीछे कांग्रेस की भी यही सोच रही कि यह लोग उसके वोट -बैंक बने रहेंगे और यह होता भी रहा। इसी सोच के साथ आज भी कांग्रेस मुसलमानों के तुष्टिकरण में लगी हुयी है।
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| देश को आज़ादी मिली और इन जैसे करोड़ो लोग हुए बेघर |
भारत के बंटवारे के समय भी पश्चिमी पंजाबमें मुसलमानों ने हिन्दू -सिखों को बड़ी क्रूरता के साथ क़त्ल कर डाला और करोड़ों लोगों को अपना सब कुछ छोडकर वहां से निकलने को मजबूर कर दिया।ईमान वाले इन लोगों की क्रूरता के कारण बहुत से हिन्दू -सिख अपनी जान से हाथ धो बैठे और कईओं को जबरन इमान वाला बना कर इस्लाम के माननेवालों की संख्या में इजाफा किया। बड़ी संख्या में हिन्दू लड़कियों के साथ दुराचार करके उनको बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। ऐसा ही कत्ले -आम बंगाल में भी हुआ क्योंकि उसका पूर्वी भाग भी पाकिस्तान का पूर्वी भाग बन गया था। पंजाब और बंगाल के अलावा दुसरे क्षेत्रों ने बंटवारे के इस विषैले दंश को नहीं झेला था और इसीलिए भारत की आजादी की जो कीमत इन दोनों राज्यों के लोगों को चुकानी पड़ी वह किसी अन्य राज्य के लोगों को नहीं चुकानी पड़ी। बंटवारे के कारण विस्थापित हुए हिन्दू-सिखों को आज भी कई लोग कहते हैं कि यह पाकिस्तान से भाग कर आये हुए शरणार्थी हैं ,ऐसा कहने वाले यह नहीं जानते कि 1947 से पहले तक दुनिया के नक़्शे में कहीं भी पाकिस्तान नाम की बीमारी दुनिया में नहीं थी। विभाजन की पीड़ा को वह लोग तो कभी नहीं भूल सकते जिन्होंने इसको झेला है और उनकी आनेवाली संतानों के दिलों में भी इसकी टीस रहनी चाहिए ताकि वह भविष्य में फिर धोखा न खा सके ,परन्तु अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि हिन्दुओं की याददास्त बहुत कमजोर है। आज हम देश की आजादी का जश्न मनाने के साथ -२ इसके लिए कुर्बान हुए लाखों भारतीयों को न भूलें जिनकी कीमत पर हमें यह अवसर मिला है।

पाकिस्तान को बनाने वाली मानसिकता आज भी कम कर रही है
भारत के बंटवारे के समय भी पश्चिमी पंजाबमें मुसलमानों ने हिन्दू -सिखों को बड़ी क्रूरता के साथ क़त्ल कर डाला और करोड़ों लोगों को अपना सब कुछ छोडकर वहां से निकलने को मजबूर कर दिया।ईमान वाले इन लोगों की क्रूरता के कारण बहुत से हिन्दू -सिख अपनी जान से हाथ धो बैठे और कईओं को जबरन इमान वाला बना कर इस्लाम के माननेवालों की संख्या में इजाफा किया। बड़ी संख्या में हिन्दू लड़कियों के साथ दुराचार करके उनको बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। ऐसा ही कत्ले -आम बंगाल में भी हुआ क्योंकि उसका पूर्वी भाग भी पाकिस्तान का पूर्वी भाग बन गया था। पंजाब और बंगाल के अलावा दुसरे क्षेत्रों ने बंटवारे के इस विषैले दंश को नहीं झेला था और इसीलिए भारत की आजादी की जो कीमत इन दोनों राज्यों के लोगों को चुकानी पड़ी वह किसी अन्य राज्य के लोगों को नहीं चुकानी पड़ी। बंटवारे के कारण विस्थापित हुए हिन्दू-सिखों को आज भी कई लोग कहते हैं कि यह पाकिस्तान से भाग कर आये हुए शरणार्थी हैं ,ऐसा कहने वाले यह नहीं जानते कि 1947 से पहले तक दुनिया के नक़्शे में कहीं भी पाकिस्तान नाम की बीमारी दुनिया में नहीं थी। विभाजन की पीड़ा को वह लोग तो कभी नहीं भूल सकते जिन्होंने इसको झेला है और उनकी आनेवाली संतानों के दिलों में भी इसकी टीस रहनी चाहिए ताकि वह भविष्य में फिर धोखा न खा सके ,परन्तु अफ़सोस के साथ कहना पड़ता है कि हिन्दुओं की याददास्त बहुत कमजोर है। आज हम देश की आजादी का जश्न मनाने के साथ -२ इसके लिए कुर्बान हुए लाखों भारतीयों को न भूलें जिनकी कीमत पर हमें यह अवसर मिला है।
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पाकिस्तान को बनाने वाली मानसिकता आज भी कम कर रही है |
आज भारत की स्थिति कोई अच्छी नहीं कही जा सकती। कश्मीर से लाखों पंडितों को अपने घरों से जबरन बाहर खदेड़ देनेवाले मुस्लमान अब जम्मू में भी अपना जिहादी नरसंहार शुरू करके वहाँ भी सिर्फ इमान वाले लोगों को रहने देने की मुहीम चला हुए हैं। यह मुहीम उसी सोच का हिस्सा है जो पाकिस्तान को बनवा चुकी है और अब धीरे -2 पुरे भारत को अपनी आगोश में लेती जा रही है। इन लोगों को अपने को कथित सेकुलर कहनेवाली पार्टियाँ और लोग भी अपना समर्थन दे रहे हैं। अगर यह सब यूँही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब न तो हिन्दू रहंगे और न ही उनका राष्ट्र भारत।जो लोग पाकिस्तान से मधुर संबंध बनाने के हिमायती हैं उन्हें पाकिस्तान के इतिहास को नहीं भूलना चाहिए। अब तक कितनी बार पाकिस्तान ने भारत को जख्म दिए हैं और हर बार भारत को उससे वार्ता करके क्या मिला ? पाकिस्तान दूषित मानसिकता की पैदावार है जिसे आज भी उसके शासक पाले हुए हैं इसलिए वह कभी नहीं सुधरेगा
Saturday, 10 August 2013
मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति और धारा 370 ही भारत को तबाही की राह पर ले जा रही है
भारत की यूपीए सरकार आज देश की सीमायों और जनता की सुरक्षा करने में पूरी तरह नाकाम है और अपने मुस्लिम वोट -बैंक को बनाये रखने की लालसा में देश की एकता -अखंडता को दाव पर लगा रही है। यही कारण है कि वह पाकिस्तान को उसकी हर बार उदंडता का जवाब देने की बजाय उसके साथ प्रेम और भाईचारे को बनाने की इकतरफा कौशिश में जुटी हुयी है। कांग्रेस और उस जैसी तमाम मुस्लिम वोटों की लालची राजनैतिक पार्टियों की इसी मानसिकता का फायदा देश के अन्दर बैठे अलगाववादी ताकतें और उनका आका पाकिस्तान उठाने में लगे हैं और इसी मानसिकता के कारण 1 9 4 7 में देश का बंटवारा हुआ था।आज वोट -बैंक की नीति और संविधान की धारा 3 7 0 को हटाकर ही भारत को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है।
Thursday, 8 August 2013
देश के लिए बड़ा खतरा बन चुकी यूपीए सरकार को हटाना अति आवश्यक है
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यह हमारे देश का दुर्भाग्य है कि आज हमारी सरकार का मुखिया ऐसा व्यक्ति है जो न तो बोलता है और न ही कुछ करता हुआ प्रतीत होता है।रिमोट कंट्रोल से चलने वाला यह प्रधानमंत्री सिर्फ मिट्टी का ही शेर लगता है जो पूरी दुनिया में भारत जैसे महान राष्ट्र को आज एक कमजोर और डरपोक देश की पंक्ति में खड़ा कर चूका है।देश की सुरक्षा ,जनता की रक्षा ,मान -सम्मान ,एकता -अखंडता .और साख को नुकसान पहुँचाने वाली यूपीए सरकार आज देश के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुकी इस सरकार से देश को शीघ्र मुक्त करवाना ही सबका राष्ट्र धर्म है
Friday, 27 April 2012
HINDU KO PAHLE CHAMATKARON OR PAKHANDON KO CHHODNA HOGA
hindon ko pahle apni buraion ki taraf bhi sochna chahiye sirf pooja path or ye babaon ke pichhe bhagne ki parvarti ko tyag kr jine ki adat banani hogi /sirf chamatkar or pakhando ke sahare koi kom jinda nahi rahti ,usko jinda rakhne ke liye tyag ,tapsya or will-power ki zaroot hoti hea.aj hindu bhag rha hea dhongi babaon ke pichhe ,tantrikon ke pichhe jo esko lootne ke sath-sath kamjor or kayar bana rahe hen ,kisi bhi dushman se ladne se pahle apne ko mazboot karo or chamatkaron or pakhando kotyago or dhongi katha vachko or tantrikon ka pichha chhodo tabhi hindu bach sakta hea anytha koi bhi bhagwan or koi bhi chamatkar inhen nahi bacha sakta.
Tuesday, 24 April 2012
NAKARA SABIT HOTI MANMOHAN KI SARKAR
MANMOHAN KI SARKAR HER MORCHE PR NAKAM HO CHUKI HEI /YEH SARKAR JANTA KO MAHNGAI OR BHARSHTACHAR KI MAR SE DABATI JA RHI HEA/JANTA KO NA TO MAHENGAI SE OR NA HI IS JANVIRODHI SARKAR SE HI MUKTI MIL PA RHI HEA/ KAI STATES MEN ATANK OR NAKSLITE APNA RODR ROOP DIKHA RAHE HEIN OR SARKAR SIRF BIYAN BAZI MEIN HI LAGI HUI HEA /KANHI MLA TO KANHI DM KA APHARAN HO RHA HEA OR SARKAR KOI THOS KARVAI KARNE KI BAJAY APHARAN KRTAON KE AGE GHUTNE TEK RHI HEA /SIRF OR SIRF VOTON KI KHATIR DESH KI SURKSHA KO TAK PR RAKH CHUKI UPA GOVT.OR USKE SAHYOGI JANTA KO SHANT VATAVARAN DENE MEIN NAKAM SABIT HUI HEA/ SARKAR KI NAKAMI OR BHARSHTACHAR SE JANTA BURI TRANHA SE TRST HO CHUKI HEA OR ISI KA RESULT HUME PICHLE KUCH CHUNAVON MEIN DEKHNE KO MILA BHI HEA / LEKIN SATTA KE MAD MEIN DUBE CONGRESS KE SOCALLED LEADER SIRF MALL BATORNE OR RANGRALIYAN MANANE MEIN HI SARA SAMAY BITA RHE HEIN /
Saturday, 14 January 2012
KALE DHANWALON KI BOKHLAHT OR DIGVIJAY KI JUBAN SE PARERIT HO RAHE HEIN KAMRAN JAISE SIRFIRE LOG
BABA RAMDEV PR INK DALNE KI KARTOOT KE PICHHE IK TO ON LOGON KI BOKHLAHT KAM KAR RAHI HEA JINKA KALA DHAN SWIS BANK MEIN HEA OR DOOSARY AUR DIGVIJAY JAISE LOGON KI MUSLIM PRAST JUBAN HEA JO HAR CHIJ KO SIRF MUSLIM VOTON KO PANE KI NAZAR SE DEKHTE HEIN.KAMRAN TO IKMOHRA HEA ASLI GONAHGAR DIGVIJAY JAISE LOG HEIN JO DESH KA MAHOL APNI GANDI RAJNITI OR GANDI MANSIKTA KE KARAN KHARAB KAR RAHE HEIN .
Thursday, 4 August 2011
HINDUON KE NAM PER KALANK HEIN NETA
Ashwani Bhatia Hinduon ke nam pr kalank hein ye neta inhen na to dharam se koi lena -dena hea na hi inhe is bat se koi sarokar he ki hinduon ka bhavishya ko khatra hea . Ye haramion ko to bus kursi chahiye chahe iske liye inhen dharam hi kyon na badlna pade ya fir apni man -bahno ko bhi muslmano ko kyon na bhana pade .Agar inhe desh se pyar hota to ye kabhi bhi bharat ka vibhajan sawikar nahi karte.Ajadi ke bad bhi desh ke hinduon ko batne ke har parkar ke parpanch netaon ne kiye hein /Voton ki rajniti karne mein lage sare dal sirf kursi ki khatir desh ko batne mein lage huyen hein /Hinduon ke nam pr thekedari karnewale sangathan bhi sirf mal batone mein hi lage hein ,jitna nuksan hinduon ka jhuthe or pakhandi babaon ne kiya hea utana hi vote ke bhukhe netaon ne kiya hea /Hinduon ko bhi apni aankhe khol kr ye dekhna padega ki hamara nuksan kon kr raha hea or is se kaise bacha ja sakta hea /
Monday, 1 August 2011
HINDU KO PAHLE CHAMATKARON OR PAKHANDON KO CHHODNA HOGA
hindon ko pahle apni buraion ki taraf bhi sochna chahiye sirf pooja path or ye babaon ke pichhe bhagne ki parvarti ko tyag kr jine ki adat banani hogi /sirf chamatkar or pakhando ke sahare koi kom jinda nahi rahti ,usko jinda rakhne ke liye tyag ,tapsya or will-power ki zaroot hoti hea.aj hindu bhag rha hea dhongi babaon ke pichhe ,tantrikon ke pichhe jo esko lootne ke sath-sath kamjor or kayar bana rahe hen ,kisi bhi dushman se ladne se pahle apne ko mazboot karo or chamatkaron or pakhando kotyago or dhongi katha vachko or tantrikon ka pichha chhodo tabhi hindu bach sakta hea anytha koi bhi bhagwan or koi bhi chamatkar inhen nahi bacha sakta.
Saturday, 16 July 2011
नपुंसक और नकारा नेता नही कर सकते देश और देशवासीओ की सुरक्षा
मुंबई में बॉम्ब ब्लास्ट करके एक बार फिर आतंकवादियों ने ये साबित कर दिया है कि भारत की बागडोर नपुंसक ओर नाकारा लीडरो के हाथ में है. हर बार की तरह इस बार भी सरकार चलानेवालों ने लोगों से संयम बरतने की अपील की ओर कुछ राहत राशि की घोषणा करने की रस्म अदायगी कर दी. प्रधान मनती और उनकी नकेल संभालने वाली सोनिया गाँधी ने भी अस्पताल में जाकर पीड़ितो का हाल पूछ कर देश की जनता पर बहुत बड़ा उपकार कर दिया. दूसरी ओर से देश की बागडोर संभालने के पूर्व अभ्यास में लगे कॉंग्रेस के स्वघोषित युवराज राहुल गाँधी ने देश की जनता को समझा दिया कि सरकार उनकी सुरक्षा हर वक़्त नही कर सकती. उन्होने कहा कि १-२ धमाके तो होंगे ही उसे हम नही रोक सकते. एक तरह से उन्होने सच ही कहा है क्योंकि उनकी इस नकारा ओर नपुंसक सरकार से सुरक्षा की उम्मीद करना भी बेकार की बात है क्योंकि सुरक्षा की ज़रूरत जनता को नही इन नकारा ओर नपुंसक लीडरो को है और उसको देश के सुरक्षा बल करने में लगे ही हुए हैं. रही बात जनता की, तो, उसे तो मरना ही है, फिर चाहे वो भूख से मरे, अस्पताल से इलाज़ ना होने के कारण मरे, रेल दुर्घटना मे मरे या फिर पुलिस के हाथों मारी जाए उसे तो मरना ही पड़ेगा. अगर वो आंतकवादी हमलो में मारी जाए तो इस से इन सत्ताभोगिओं को क्या फ़र्क पड़ता है?
Friday, 15 July 2011
NAKARA OR NAPUNSAK NETA NAHI KR SAKTE DESH KI SURKSHA ?
Mumbai men bomb blast karke ek bar fir aatankvadiyon ne ye sabit kr diya hea ki BHARAT ki bagdor NAPUNSAK OR NAKARA leadron ke hath mein hea.Har bar ki tarhan es bar bhi sarkar chalanewalon ne logon se saiyum bartan ki apeal ki or kuch rahat rashi ki ghoshna karke rasm adaygi kr di.PM or unki bagdor chalanewali sonia gandhi ne bhi hospital mein jakr ghaylon ka hal puch kr desh ki janta pr bhut bada upkar kr diya .Dusri or se desh ki bagdor sambhalne ke porv abhyas mein facebookjute Congress ke KATHIT YUVRAJ RAHUL GANDHI ne desh ki janta ko samjhaya diya ki sarkar unki surksha her vaqt nahi kar sakti. Ek taranh se unhone such hi kha hea es nakara or napunsak sarkar se surksha ki umid karna bhi bekar ki bat hea ,surksha janta ki nahi en nakara or napunsak leadron ki zaroort hea or usko desh ke surksha bal karne mein lage huye hen.rahi bat janta ki to use to marna hi hea fir chahe vo bhukh se mare ,hospital se elaj na hone ke karan mare ,rail accident men mare ya fir police ke hathon mari jaye use to marana hi hea agar vo aatankvadion ke hamlon men mar jaye es se en satta bhogion ko kya fark padta hea?
Tuesday, 5 July 2011
DHONGI BABAON OR TANTRIKON SE HEA SAMAJ KO KHATRA
Ajkal samaj mein dhongi baba or tantrik bhole bhale logo
ko lootne mein lage huye hein /En dhongion ke jall mein
fas kar kai log apna jiwan barbad kar chuke hein or bahut
si mahilayen bhi apna sarvas loota kar apnno ke bich hi
tiskrit hogai hein /Etna hone ke bad bhi vishesh tor se
hindu samaj en dhongion ke pichhe pagal hua ghum rha
hea / EK JAGAH PER Kai logon ko lootkar ye dhongi dusri jagah per jaker
doosre nam se apni dukan khol kar logon ko thagne mein
lag jate hein /Hindu samaj bhi apne shaktishali AVTARON
ko chhodkar en kukrmi dhongion ke pass jakr apni paresh-
anion ka upay doond raha hea or inki samsya ke samadhan
ke nam per ye dhongi baba or tantrik unse paisa bhi loot
rahe hein or mahilaon ka sharirik shoshan tak karte hein /
Hindu samaj ko en dhongi BABAON or TANTRIKON ke
pichhe bhatkne ki bjay apne avtaron mein vishwas karna
chahiye or khaskar apni mahilaon ko en dhongi babaon or
tantrikon ke pass jane se rokna chahiye /Hindu samaj en
dhongion ke pass jakar apna paisa to loota hi rha hea sath
hi apni mhilaon ki ejjat se bhi enhen khilwad karne ka avsar
pardan kar raha hea/
ko lootne mein lage huye hein /En dhongion ke jall mein
fas kar kai log apna jiwan barbad kar chuke hein or bahut
si mahilayen bhi apna sarvas loota kar apnno ke bich hi
tiskrit hogai hein /Etna hone ke bad bhi vishesh tor se
hindu samaj en dhongion ke pichhe pagal hua ghum rha
hea / EK JAGAH PER Kai logon ko lootkar ye dhongi dusri jagah per jaker
doosre nam se apni dukan khol kar logon ko thagne mein
lag jate hein /Hindu samaj bhi apne shaktishali AVTARON
ko chhodkar en kukrmi dhongion ke pass jakr apni paresh-
anion ka upay doond raha hea or inki samsya ke samadhan
ke nam per ye dhongi baba or tantrik unse paisa bhi loot
rahe hein or mahilaon ka sharirik shoshan tak karte hein /
Hindu samaj ko en dhongi BABAON or TANTRIKON ke
pichhe bhatkne ki bjay apne avtaron mein vishwas karna
chahiye or khaskar apni mahilaon ko en dhongi babaon or
tantrikon ke pass jane se rokna chahiye /Hindu samaj en
dhongion ke pass jakar apna paisa to loota hi rha hea sath
hi apni mhilaon ki ejjat se bhi enhen khilwad karne ka avsar
pardan kar raha hea/
SAMAJIK ASAMANTA BADA RAHI HEA APRADHON KO _ASHWANI BHATIA
SAMAJIK ASAMANTA BADA RAHI HEA APRADHON KO _ASHWANI BHATIA
Aj samaj mein apradhon ki badh si aa gai hea.Samaj mein badti asamanta ke karan logon mein ek dusare ke perti badle or nafrat ki bhawna badti ja rahi hea.Ek taraf aise log hein jo apne pariwar ke liye 2 waqt ki roti bhi mushkil se juta pa rahe hein vanhi dusri or aise logon ki jmat bhi hea jo lakhon-kroron ek hi din mein aiyashi mein uda dete hein. Es samajik asamanta ke karan hi aaye din apradhon ki vardaten badti ja rahi hean .Jab tak sarkar es asamanta ko nahi mitati tab tak samaj mein shanti esthapit nahi ho sakti lekin sarkar ki nitiyan aisi hein ki asamanta ghatne ki bjay or badti ja rahi hea agar samay rahte es or sarkar ne dhiyan nahi diya to aage chalkr eske or bhi bhyank parinam dekhne ko mil sakte hein.Afsos ki bat hea ki dharam or samaj ke katit thekedar bhi es or se apni aankhen band kiye huye hein.
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