Tushrapat

Tuesday, 7 January 2014

हिन्दू धर्म की रक्षा में जिस त्याग और तपस्या की इबारत को गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके लिखा, उसको जब तक इस दुनिया का अस्तित्व रहेगा तब तक याद रखा जायेगा


हिन्दू धर्म के महान रक्षक गुरु गोबिंद सिंह जी ने अधर्मी और अन्यायी ताकतों के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष करके जिस शौर्य और वीरता का उदहारण हमारे सम्मुख रखा उसका पूरा हिन्दू  समाज सदैव ऋणी रहेगा। गुरु जी ने अपने समय के अत्याचारी मुग़ल शासकों के विरुद्ध तलवार उठायी और अपना पूरा वंश धर्म  और राष्ट्र की रक्षा में न्योछावर करके जो अनौखा बलिदान दिया उसका पूरे इतिहास में कोई दूसरा उदाहरण देखने को नहीं मिल सकता। हिन्दू धर्म की  रक्षा में जिस त्याग और तपस्या की इबारत को  गुरु गोबिंद सिंह ने अपना सर्वस्व न्यौछावर करके लिखा, उसको जब तक इस दुनिया का अस्तित्व रहेगा तब तक याद रखा जायेगा। अपने पिता नवम गुरु तेग बहादुर के बलिदान के बाद गोबिंद राय ने धर्मयुद्ध को जारी रखते हुए अपने चारों पुत्रों को हिन्दू धर्म की बलिवेदी पर आहुति के रूप में समर्पित करके हताशा और निराशा में डूबे लोगों में शेरों जैसी शक्ति का संचार किया जो आज भी भारत माँ के सम्मान और आन के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने के लिए सिखों के सवरूप में हमेशा देखने को मिलता है। 

             पाँच दरियाओं की भूमि पंजाब सदियों से भारत राष्ट्र का सबसे प्रथम वो क्षेत्र रहा है जिसने विदेशी आक्रांताओं का सबसे पहले मुकाबला किया और हमेशा अपने को लहू -लुहान किया।  इसके वीर पुत्रों -पुत्रिओं ने अपने प्राणों की आहुति देकर सैदेव अपने राष्ट्र और धर्म की रक्षा की ।  ऐसी भूमि पर जन्में पौरस ने विश्विजय के अभियान पर निकले  यूनान के  सम्राट सिकंदर को  रोककर पंजाब की भूमि और भारत माँ के सम्मान के लिए वीरता से युद्ध करके अपने पुत्र होने का धर्म निभाया।आगे चलकर मुग़ल काल  में धर्म और  राष्ट्र  पर आये संकट को समाप्त करने हेतु  आगे बढ़कर हमारे गुरुओं ने अपना धर्म निभाया।इस दौर के धरमयुध में गुरु गोबिंद सिंह का योगदान अतुलनीय है।हम आज  हिन्दू धर्म के महान रक्षक गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाशोत्सव पर उनके चरणों में हमारा शत -२ नमन करते हैं। 

        आज हिन्दू धर्म फिर चारों ऒर से संकट में घिर चूका है और इसके अनुयायी पाखंडों और पोंगा -पंडितों में फंस कर अपने कर्त्तव्य से विमुख होते जा रहे हैं। अब समय आ गया है कि हम भारत माँ के उन महान सपूतो के बलिदान को अपने दिलो -दिमाग में रखकर उनके बताये हुए सिंद्धांतों को अंगीकार करें। हिन्दू धर्म का अस्तित्व रहेगा तो यह महान राष्ट्र भी दुनिया में अपने गौरव को बचाकर रख पायेगा। यह पुण्य कार्य हम अपने महान संत -सिपाही गुरु गोबिंद सिंह के बताये और सुझाये मार्ग पर चल कर ही कर सकते हैं। आओ आज हम सब अपने उस अकाल पुरुष महान योद्धा और युगद्रष्टा सरवंश बलिदानी गुरु गोबिंद सिंह के जन्मदिवस पर अपने धर्म और राष्ट्र की रक्षा हेतु  अपने को समर्पित करने का प्रण लें। http://tusharapat.blogspot.in/2014/01/blog-post_7.html

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