Tushrapat

Tuesday, 4 March 2014

आज भी हिंदुओं को एक कमजोर और डरपोक धर्म इसीलिए माना जा रहा है कि हमें अपने देवी -देवताओं और अवतारों से ज्यादा भरोसा पाखंडी बाबाओं ,मुल्ला -मौलीविओं ,ज्योतिषों -तांत्रिकों , दैवीय चमत्कारों और मज़ारों पर है।

हिन्दू आज इतना कमजोर और डरपोक क्यों बन गया है ?इस तरफ न तो हिन्दू धर्म के झंडाबरदारों ने और न ही इसके धर्माचार्यों ने ही सोचने की आवश्यकता महसूस की है। सच तो यह है कि हिंदुओं को इस स्थिति में लाने के जिम्मेदार ही वो लोग हैं जो हर परेशानी का हल पाठ -पूजा और व्रत -उपवास को बताते हैं। हम अपने अवतारों को पूजते तो हैं परन्तु उनमें हमारा विश्वास नहीं है अगर ऐसा होता तो हिन्दू समाज बाबाओं ,तांत्रिकों ,मुल्ला -मौलविओं के यहाँ  न धक्के खाता फिरता और न ही मजारों -कब्रों पर  प्रशाद और चद्दर चढ़ाता फिरता। हमारे किसी भी अवतार ने चाहे वो श्री राम हो या श्री कृष्ण हमें संकट के समय भगवान से गिड़गिड़ाने की शिक्षा नहीं दी ,उन्होंने तो कर्म करने और पूरी शक्ति से संकट का मुकाबला करने की राह हमें दिखाई है। इन अवतारों ने भी स्वयं अधर्मी और अत्याचारिओं का ताकत के साथ मुकाबला किया और उन आततायी शक्तिओं का समूल नाश करके धर्म और राष्ट्र की रक्षा करके एक रास्ता और आदर्श हमें दिखाया। हमारे सभी देवी -देवताओं ने भी आसुरी शक्तिओं से सशस्त्र मुकाबला किया और उनपर विजय पाई,  लेकिन हमने उनकी पूजा को ही अपनी मुसीबतों का हल समझ लिया। पूजा - पाठ करना कोई बुरी बात नहीं है परन्तु जब दुश्मन सामने तलवार लिए हमारा सर काटने पर उतारू हो तो उस समय पूजा -पाठ ,प्रार्थना करना कभी भी हमारे हित में नहीं हो सकता। अफ़सोस इस बात का है कि हिंदुओं ने अपने अवतारों और भगवानों को पूजना तो जारी रखा मगर उनकी दिखाई राह पर चलना छोड़ दिया। जब कभी परेशानी से सामना हुआ तो उसका मुकाबला करने की बजाय टोने -टोटके ,बाबाओं के पैरों में गिरकर उनसे मदद की गुहार करने ,तांत्रिकों से उपाय पूछने ,कब्रों -मजारों पर माथा रगड़ने की राह को चुना और किसी दैवीय चमत्कार की ही कामना करने को प्राथमिकता दी। हमारी इसी मानसिकता के कारण हमारी बार -२ पिटाई हुयी और हम एक हज़ार वर्षों तक गुलाम रहे। पूरी दुनिआ में कोई दूसरा ऐसा देश या धर्म नहीं है जो इतने लम्बे समय तक गुलाम रहा हो। इतना होने के बाद भी हमने अपने इतिहास में हुई गलतिओं से कोई सबक नहीं लिया। हमारी इसी सोच से हमारे देश का टुकड़ा हुआ और धर्म को भी कमजोर माना गया। आज भी हिंदुओं को एक कमजोर और डरपोक धर्म इसीलिए माना जा रहा है कि हमें अपने देवी -देवताओं और अवतारों से ज्यादा भरोसा पाखंडी बाबाओं ,मुल्ला -मौलीविओं ,ज्योतिषों -तांत्रिकों , दैवीय चमत्कारों और मज़ारों पर है। जब हम अपने भगवान पर ही विश्वास नहीं कर रहे तो वह हमारी मदद कैसे कर सकता है ?आज हिन्दू दर -दर भटकने , अलग -२ मतों को मानने के चककर में पड़ कर अपना ,अपने धर्म और राष्ट्र का अहित करने में लगा हुआ है ,हम इस बात को भूल रहे हैं कि दुनिआ में हमेशा ताकतवर के कुत्ते को भी कोई नहीं छेड़ता और कमजोर के भगवान की भी पिटाई होती है। इसके साथ पूरी दुनिआ में भारत के अलावा कोई दूसरा ऐसा राष्ट्र नहीं है जहां हिंदुओं को पनाह मिल सकेगी। इस बात को हमें गम्भीरता से सोचना पड़ेगा कि हमें किस राह पर चलना है ?अपने देवी -देवताओं राम -कृषण के बताये मार्ग पर या लालची -लम्पट बाबाओं ,मुल्ला -मौलविओं  के सुझाय टोटकों को मानकर अपना आर्थिक और शारीरिक शोषण करवाना है या फिर कब्रों और मज़ारों पर अपना माथा रगड़कर अपने धर्म को कमजोर बनाना है ?

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