हिन्दू नव वर्ष विक्रम संवत 2071 [31 मार्च ,2014 ]की सभी को हार्दिक शुभकामनायें। आओ, हम इस अवसर पर अपनी गौरवशाली संस्कृति और धर्म की रक्षा का संकल्प लें।हम अपनी जड़ों से कटें नहीं बल्कि उसके साथ मजबूती के साथ खड़े हों ,इससे ही हमारे धर्म ,संस्कृति - मर्यादा की पहचान विश्व में कायम रह पायेगी। एक बात और जो हमें हमेशा याद रखनी चाहिए कि पुरे विश्व में हिंदुओं के रहने के लिए एकमात्र भारत भूमि ही शेष बची है। इस भारत भूमि का अस्तित्व तभी तक है जब तक यहाँ पुरातन धर्म -संस्कृति अस्तित्व में है ,जहां से सनातन संस्कृति -धर्म की पहचान समाप्त हो गयी वहीं धरमनिर्पेक्षता ,लोकतंत्र और शांति का भी लोप हो गया। इसका सबसे नवीनतम और जीता -जागता उदहारण पाकिस्तान और बांग्लादेश के रूप में हमारे सामने है। हमें इस भ्रम और भुलावे में नहीं रहना चाहिए कि हम अपने धर्म -संस्कृति की जड़ों से कटकर भी इस दुनिया में अपनी हज़ारों वर्ष पुरानी पहचान को कायम रख पाएंगे। इसी लिए हमें इस नव वर्ष पर यह प्रण करना चाहिए कि हम देश -धर्म और अपनी आनेवाली नस्लों की सुरक्षा के लिए देश की बागडौर मजबूत हाथों में सौंपे न कि तथाकथित धरमनिर्पेक्षता का ढिंढौरा पीटनेवाले अल्पसंख्कों के नाम पर सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण करने में लगे ढोंगी दलों और नेताओं के हाथ में।