Tushrapat

Wednesday, 16 October 2013

यह कुर्बानी है या कत्ल ? कुर्बानी हमेशा कमजोरों की दी जाती है शेरों की नहीं

इसे कुर्बानी कहे या कत्ल ?
 मेरी समझ मे नही आता कि हम बेजुबान ,निरिह मासूम जानवरो के बेरहमी से किए गए कत्ल को मुबारक कैसे माने ?किसी को भी किसी की जान लेने की इजाजत नहीं है फिर भी किसी को खुश करने के लिए एक ही दिन में असंख्य जानवरों को मौत के घाट उतार कर हम खुशी मनाते हें और इस काम को पुन्य सम्झते हें। कुर्बानी कमजोरों की ही होती है ,क्या कभी शेरों की कुर्बानी देने की हिमाकत कोई कर सकता है?तो इसका जवाब न में ही होगा। कुर्बानी के नाम पर किए गए कत्लों को आप कुछ भी कहें लेकिन हम तो इसे कमजोर बेजुबान जीवों के प्रति किया गया अपराध ही कहेंगे। जो लोग और संगठन जीवों पर किए जाने वाले अत्याचार पर हो हल्ला मचाते हें और मीडिया भी दिवाली पर की गई आतिश्बाज़ी को वायु प्रदुषण कह कर शोर मचाता है, उन्हें बेजुबान जानवरों को कत्ल किए जाने पर मानो साँप क्यों सुन्घ जाता है।